अटल जी की 8वीं पुण्यतिथि पर आयोजित ‘काव्यांजलि’ का सार
माटी कला बोर्ड और संस्कार भारती साहित्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 8वीं पुण्यतिथि पर एक भव्य काव्यांजलि का आयोजन किया गया।

* संयोजक व संचालक: कार्यक्रम का संयोजन राज्यमंत्री शोभाराम प्रजापति ने किया। डॉ. राजकुमार राज उपाध्याय ने मां सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का आगाज और संचालन किया।
* काव्य पाठ व प्रस्तुतियां:
* नरेंद्र आहूजा (रंगकर्मी): अटल जी की प्रसिद्ध कविता “हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय” का वाचन किया।
* मनीष श्रीवास्तव (लेखक व कवि): स्वरचित कविता “अटल विश्व में अटल नाम है” का लयबद्ध पाठ किया।
* किसलय क्रांतिकारी: अटल जी की रचना “कदम मिलाकर चलना होगा” प्रस्तुत की।
* अजय त्यागी: “हास्य-रुदन में, तूफानों में, अमर बलिदानों में” का पाठ किया।
* चिकित्सक टेक वल्लभ: अटल जी की भावपूर्ण कविता “गीत नया गाता हूँ / मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ” का वाचन किया।
* डॉ अशोक शर्मा आर्य (वरिष्ठ साहित्यकार): कालजयी पंक्तियां “हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं” सुनाईं।
* तेजपाल तेज: हास्य कविता से श्रोताओं को बांधा।
* विचार व संस्मरण:
* अजीत सिंह (उपाध्यक्ष, किसान आयोग): अटल जी के सपनों के भारत को साकार करने का संकल्प दोहराया।
* आदेश सैनी (उपाध्यक्ष, पिछड़ा आयोग): रुड़की में अटल जी के प्रवास से जुड़ा प्रेरक संस्मरण साझा किया।
* महेंद्र काला (वरिष्ठ भाजपा नेता): अटल जी के सादगीपूर्ण जीवन और व्यक्तित्व को याद किया।
उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों—दिनेश कौशिक, अफजल सिद्दीकी, राजीव गर्ग, अमित सिंघल, प्रदीप त्यागी, गौतम, भीमसिंह, सुंदरलाल, विवेक कंबोज, सुधीर चौधरी, डॉ. बी. एल. अग्रवाल, राकेश प्रजापति और नागेन्द्र सिंह ने अटल जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम’ के साथ हुआ।
