चमन लाल महाविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) पर ऑनलाइन व्याख्यान
लंढौरा l चमन लाल महाविद्यालय (स्वायत्त), में आज बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विषय पर एक विशेष ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम यूकॉस्ट (UCOST), देहरादून के तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11:00 बजे ऑनलाइन हुआ। इस व्याख्यान के मुख्य संरक्षक महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष राम कुमार शर्मा एवं आइक्यूएसी कोऑर्डिनेटर डॉ. दीपा अग्रवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अभिभावकगण में पं. ईश्वर चंद्र शर्मा, पं. अरुण हरित और पं. अतुल हरित शामिल रहे, जिन्होंने आयोजन की सफलता हेतु सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. प्रशांत कुमार, डीएवी पी.जी. कॉलेज, देहरादून (उत्तराखंड) उपस्थित रहे। उन्होंने अपने सारगर्भित व्याख्यान में बौद्धिक संपदा अधिकार की महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के युग में ज्ञान, शोध और नवाचार को संरक्षित करना अनिवार्य हो गया है। चाहे वह साहित्य हो, वैज्ञानिक शोध, औद्योगिक डिज़ाइन या फिर किसी उत्पाद का आविष्कार – उसकी वैधानिक सुरक्षा के बिना सृजनकर्ता का श्रम सुरक्षित नहीं रह सकता। प्रो. प्रशांत कुमार ने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिज़ाइन और भौगोलिक संकेत जैसे विषयों को सरल उदाहरणों के साथ समझाया। उन्होंने विशेष रूप से छात्रों और शोधार्थियों को यह प्रेरणा दी कि वे अपने कार्यों को केवल सृजन तक सीमित न रखें, बल्कि उसे पंजीकृत कराकर बौद्धिक अधिकारों के माध्यम से सुरक्षित भी करें। उन्होंने कहा हैं कि ज्ञान तभी सार्थक है जब वह संरक्षित होकर समाजहित में प्रयोग किया जाए। इस व्याख्यान का आयोजन आईपीआर सेल, चमन लाल महाविद्यालय की कोआर्डिनेटर डॉ. अनामिका चौहान द्वारा किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करते हैं और उन्हें नवाचार तथा शोध की दिशा में प्रेरित करते हैं। आईपीआर सेल की संयोजक डॉ. अनामिका चौहान ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में बौद्धिक जागरूकता बढ़ाते हैं और उन्हें अपने सृजन को सुरक्षित करने की प्रेरणा देते हैं। अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी, संकाय सदस्य और शोधार्थी उपस्थित रहे।
