वननेस वन-प्रकृति के साथ समरसता

हरित भविष्य की ओर संत निरंकारी मिशन का जन आंदोलन

लाम मजाहिदपुर। मसाई कला, 23 अगस्त, 2026:- बाबा हरदेव सिंह जी का दिव्य संदेश *‘प्रदूषण अंदर हो या बाहर दोनों ही हानिकारक है’*, केवल पर्यावरण संरक्षण का आह्वान नहीं, बल्कि मानवीय चेतना को निर्मल और प्रकृति के प्रति उत्तरदायी बनाने का प्रेरणास्रोत है। इसी प्रेरणा को साकार रूप देते हुए संत निरंकारी मिशन अपनी पर्यावरण संरक्षण की पहल ‘वननेस वन-प्रकृति के साथ समरस्ता’ के माध्यम से हरित, संतुलित एवं सतत भविष्य के निर्माण हेतु निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रहा है।
इसी कड़ी मे मसाई कला ब्रांच के संयोजक आदरणीय मदन सिंह ने बताया कि ब्रांच समीप इब्राहिमपुर शमशान घाट के प्रांगण मे भी आज *वननेस वन* परियोजना का छठा चरण का आयोजन किया गया इस चरण मे पेडो की देखभाल, निराई गुडाई की गई। अनेक सेवादल के भाई-बहनो ने अपनी सेवाऐ निभाई।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन आशीर्वाद से अगस्त 2021 में प्रारम्भ हुई यह अनूठी पहल आज देशव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुकी है। इसका उद्देश्य केवल वृक्षारोपण करना नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध को पुनर्जीवित करना, पर्यावरण संरक्षण को जीवन-मूल्य के रूप में स्थापित करना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वच्छ एवं संतुलित पृथ्वी का निर्माण करना है। समय के साथ यह अभियान निरंतर विस्तार पाते हुए देशभर में लाखों लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा दे रहा है।
इसी सतत प्रयास को आगे बढ़ाते हुए, रविवार को इस महाअभियान के छठे चरण का शुभारंभ किया । यह अभियान देशभर के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों सहित 630 स्थानों पर एक साथ आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर मिशन के लाखों श्रद्धालु एवं स्वयंसेवक समर्पित भाव से सहभागिता निभाते हुए लगभग 10 लाख पौधों का रोपण गये।
आज जब विश्व जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के पतन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में संत निरंकारी मिशन का यह हरित संकल्प प्रत्येक नागरिक को प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देता है। यह अभियान हमें स्मरण कराता है कि धरती केवल हमारी विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सांझा जिम्मेदारी है। आइए, एक पौधा लगाकर, उसे वृक्ष बनाकर और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लेकर हम सभी इस हरित परिवर्तन के सहभागी बनें।