उर्मिलेश शंखधर स्मृति सम्मान से डॉ. आरपी सारस्वत सम्मानित, डॉ. मधुराका सक्सेना को मिला ‘रुड़की गौरव’ सम्मान
राष्ट्र की जय चेतना का गान है हिंदी,
वीरों के बलिदान की हुंकार है हिंदी।

रुड़की। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर नगर के एक होटल में कवि मंच रुड़की की ओर से भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया। खचाखच भरे सभागार में देशभक्ति, राष्ट्र चिंतन, वीर रस, गीत और कविता की शानदार प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कवि सम्मेलन का संचालन वीर रस के प्रसिद्ध कवि किसलय क्रांतिकारी ने किया, जबकि आयोजन जाने-माने राष्ट्रीय चिंतन के कवि डॉ. विनय प्रताप सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सहारनपुर से आए प्रसिद्ध गीतकार डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा ने की। वहीं देश की प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. मधुराका सक्सेना मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
इस अवसर पर हिंदी कवि सम्मेलनों के पुरोधा एवं प्रसिद्ध कवि डॉ. उर्मिलेश शंखधर की पावन स्मृति में सहारनपुर के प्रसिद्ध कवि डॉ. आरपी सारस्वत को डॉ. उर्मिलेश शंखधर स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं काव्य जगत और खेल जगत में विशेष उपलब्धियों के लिए डॉ. मधुराका सक्सेना को रुड़की गौरव सम्मान प्रदान किया गया। सम्मानित अतिथियों का उपस्थित लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
कवि सम्मेलन का आगाज कवयित्री अनुपमा शर्मा ने सरस्वती वंदना से किया। इसके बाद बाल कवि विराट हिंदुस्तानी ने हिंदी दिवस के अवसर पर अपनी प्रस्तुति देते हुए हिंदी के गौरव और महत्ता को रेखांकित किया।
युवा शायर वंश भारद्वाज ने अपनी दमदार प्रस्तुति से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उनकी पंक्तियों ने सभागार में मौजूद श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
आयोजक डॉ. विनय प्रताप सिंह ने हिंदी दिवस के अवसर पर कवि सम्मेलनों के पुरोधा डॉ. उर्मिलेश शंखधर को अपनी काव्यांजलि अर्पित की और उनकी स्मृतियों को नमन किया।
मुख्य अतिथि डॉ. मधुराका सक्सेना ने हिंदी की महत्ता को अपनी कविता के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति, परंपरा और भारतीय मनीषा से जुड़ी भाषा है। उनकी प्रस्तुति को भी श्रोताओं ने खूब सराहा।
सहारनपुर से आए प्रसिद्ध गीतकार डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा ने जब ‘बेटी चली ससुराल’ गीत प्रस्तुत किया तो सभागार भावुक हो उठा। गीत ने उपस्थित महिला और पुरुष श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
वहीं सहारनपुर से पधारे गीतकार डॉ. आरपी सारस्वत ने ‘सड़क अब आई हो मेरे गांव’ गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी प्रस्तुति पर जमकर तालियां बजीं।
कवि सम्मेलन में डीके, अनिल अमरोही, डॉ. सुखेंद्र सहित अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों ने जहां हिंदी भाषा के गौरव को अपनी रचनाओं में पिरोया, वहीं देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, रिश्तों और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर भी प्रभावशाली काव्य पाठ किया।
कार्यक्रम में समाजसेवी केपी सिंह, पवन कुमार, सुधीर सैनी, कुंवर प्रदीप अग्रवाल, डॉ. अनिल सागर, डॉ. विजेंद्र, श्रीमती बीना सिंह, बबली देवी, पुष्पा शर्मा, सुनीता सैनी, आशा धस्माना, साक्षी, अखिलेश धीमान, पंकज शाह, अमरीश ठाकुर, आशीष सैनी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं काव्य प्रेमी मौजूद रहे।
अंत में राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक उद्घोष के साथ कवि सम्मेलन का समापन हुआ। कार्यक्रम ने एक बार फिर हिंदी भाषा के प्रति प्रेम, सम्मान और राष्ट्र चेतना का संदेश दिया।
