कश्मीर से धारा 370 हटाना देशहित में अनिवार्य था : डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक

लंढौरा l चमन लाल महाविद्यालय में कश्मीर पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने संबोधन में कहा कि धारा 370 कश्मीर से हटाना देश हित में अनिवार्य था l धारा 370 के हटने से वहां पर अमन और चैन है सबको समानता का अधिकार है और सभी नागरिकों को सभी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है l पहले कहा जाता था की धारा 370 हटेगी तो खून की नदियां बहेगी इस प्रकार का डरावना संदेश दिया जाता था लेकिन परिस्थितिया बिल्कुल विपरीत है आज कश्मीर एक उत्कृष्ट राज्य के रूप में उभर रहा है l कश्मीर में सड़कों का निरंतर विकास हो रहा है निरंतर चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ रहा है l कश्मीर हर क्षेत्र में उन्नत हो रहा है l कोविड काल का जिक्र करते हुए उन्होंने अध्यापकों की सराहना की किस प्रकार उनके अभूतपूर्व योगदान से शिक्षा में कोई कमी नहीं आई l उन्होंने कहा कि व्यवहारिक ज्ञान आवश्यक है जीवन की शिक्षा धरातल पर होनी चाहिए l एक देश में दो संविधान नहीं हो सकते उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान का भी जिक्र किया l पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति अत्यंत दयनीय है वहां का लोकतंत्र डगमगा रहा है और भारत का लोकतंत्र सशक्त और मजबूत है l इस अवसर राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, राज्यमंत्री शोभाराम प्रजापति, बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो संजीव शर्मा, उत्तराखंड राजनीति विज्ञान परिषद के अध्यक्ष प्रो एम एम सेमवाल ने कश्मीर से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखा।
महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय ने महाविद्यालय की उपलब्धियां का भी जिक्र किया और दुनिया में युद्ध के माहौल को भविष्य के लिए खतरनाक बताया. महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामकुमार शर्मा ने इस प्रकार के आयोजनों की सराहना की और भविष्य में छात्र के लिए उपयोगी बताया l संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से आए हुए शोधार्थी को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए l कार्यक्रम आयोजक – समन्वयक डॉ. निशु कुमार ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया l

इन्हें प्रदान गया विशेष सम्मान
संगोष्ठी के समापन सत्र में प्रो राखी पंचोला, पूर्व प्राचार्य डॉ आर के गुप्ता, प्रो नीरजा चौधरी, प्रो हिमांशु बौड़ाई, प्रो शशि प्रभा और प्रो संजीव शर्मा को उनके अकादमिक नेतृत्व एवं शोध संबंधी कार्यों के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया।